सत्यमेव जयते : Satyameva Jayate

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Description

मुण्डकोपनिषद् का यह वाक्य कितना सुन्दर व कितना आदर्शमय है, यह आपको बताने की आवश्यकता नहीं। हमारे देश भारत की सभ्यता और संस्कृति की सही तस्वरी इसी एक वाक्य के द्वारा पूरे विश्व में पेश हो जाती है - ‘सत्य की ही जय होती है’। सत्य अजर, अमर है, शाश्वत है। सत्य की जय हर हाल में होती है।
संसार में आतंकवाद ने, जिस तरह सिर उठाकर अपनी असुरी शक्ति का प्रभाव डाला है, उससे विश्व त्रस्त है। पर वह दिन अब दूर नहीं जब दसों दिशाओं से मां दुर्गा के संहारक हाथ उठेंगे और आतंकवाद का पूरे विश्व से सफाया कर देंगे। इस उपन्यास के कथानक में, रीमा भारती को प्रतीक रूप में, उस समस्या से संघर्ष करता हुआ देखकर आप ‘सत्यमेव जयते’ के नारे को सार्थक होता हुआ पाएगें।

Satyameva Jayate

Reema Bharti

Ravi Pocket Books

BookMadaari

प्रस्तुत उपन्यास के सभी पात्र एवं घटनायें काल्पनिक हैं। किसी जीवित अथवा मृत व्यक्ति से इनका कतई कोई सम्बन्ध नहीं है। समानता संयोग से हो सकती है। उपन्यास का उद्देश्य मात्र मनोरंजन है। प्रस्तुत उपन्यास में दिए गए हिंसक दृश्योंधूम्रपानमधपान अथवा किसी अन्य मादक पदार्थों के सेवन का प्रकाशक या लेखक कत्तई समर्थन नहीं करते। इस प्रकार के दृश्य पाठकों को इन कृत्यों को प्रेरित करने के लिए नहीं बल्कि कथानक को वास्तविक रूप में दर्शाने के लिए दिए गए हैं।  पाठकों से अनुरोध है की इन कृत्यों वे दुर्व्यसनों को दूर ही रखें। यह उपन्यास मात्र 18 + की आयु के लिए ही प्रकाशित किया गया है। उपन्यासब आगे पड़ने से पाठक अपनी सहमति दर्ज कर रहा है की वह 18 + है।

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Book Title

सत्यमेव जयते : Satyameva Jayate

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352

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India

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Ravi Pocket Books

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