रावण की अयोध्या : Ravana Ki Ayodhya

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Description

ऐसी मिस्ट्री जिसको सुलझाने मे आपके दिमाग की नसें दर्द कर उठेंगीं। विलेन है—रावण। मगर वो लंका में नहीं अयोध्या में छिपा है। कौन है रावण? इससे भी बड़ा सवाल है—कहां है उसकी अयोध्या?

साथ में मिलिए—भेड़िया से—जो रेप करने की कोशिश में मारा गया मगर जिन्दा हो उठा और अपनी हत्यारिन को सताने लगा। रेखा—रेप पीड़िता। अबला? नहीं, ऐसी बला जिसने अपने मुजरिम को तिगनी का नाच नचा दिया।

गंगा-सी पवित्र विनीता, कर्तव्यनिष्ठ पुलिस वाला बालियान/महामक्कार मुकेश और विक्रम।

हर पृष्ठ पर शब्द नहीं, नगीने जड़े हैं, रहस्य के मकड़जाल में।

थ्रिल, क्राइम, इन्वेस्टीगेशन, सस्पेन्स, रोमांस, कॉमेडी व सेन्टीमेन्ट्स से लबालब कथानक।

 

Ravan Ki Ayodhya

Sunil Prabhakar सुनील प्रभाकर

 

प्रस्तुत उपन्यास के सभी पात्र एवं घटनायें काल्पनिक हैं। किसी जीवित अथवा मृत व्यक्ति से इनका कतई कोई सम्बन्ध नहीं है। समानता संयोग से हो सकती है। उपन्यास का उद्देश्य मात्र मनोरंजन है। प्रस्तुत उपन्यास में दिए गए हिंसक दृश्योंधूम्रपानमधपान अथवा किसी अन्य मादक पदार्थों के सेवन का प्रकाशक या लेखक कत्तई समर्थन नहीं करते। इस प्रकार के दृश्य पाठकों को इन कृत्यों को प्रेरित करने के लिए नहीं बल्कि कथानक को वास्तविक रूप में दर्शाने के लिए दिए गए हैं।  पाठकों से अनुरोध है की इन कृत्यों वे दुर्व्यसनों को दूर ही रखें। यह उपन्यास मात्र 18 + की आयु के लिए ही प्रकाशित किया गया है। उपन्यासब आगे पड़ने से पाठक अपनी सहमति दर्ज कर रहा है की वह 18 + है।

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Additional information

Book Title

रावण की अयोध्या : Ravana Ki Ayodhya

Isbn No

No of Pages

192

Country Of Orign

India

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Publisher Name

Ravi Pocket Books

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